बुधवार, 24 जून 2020

‘‘अब्राहिम सुल्तान की जन्म कथा‘‘

 ‘‘अब्राहिम सुल्तान की जन्म कथा‘‘
एक अधम शाह नाम का फकीर था। उसने बलख शहर से कुछ दूर एक कुटिया बना रखी थी। शहर में घूमने-फिरने आता था। एक दिन उसने बलख के बादशाह की इकलौती बेटी को देखा। वह युवा तथा सुंदर थी। अधम शाह के मन में दोष उत्पन्न हो गया और राजा के पास जाकर कहा कि इस लड़की का विवाह मेरे से कर दो। राजा हैरान रह गया। फकीर कहीं शाॅप न दे दे, इसलिए डर भी गया। अचानक हाँ या ना नहीं कह सका, कल आने को कहा। मंत्रियों को पता चला। एक राय बनी कि कल उसे कह देंगे कि राजा की लड़की से विवाह करने के लिए मोतियों का एक हार लाना पड़ता है या सौ मोती लाने होते हैं। अन्यथा विवाह नहीं होता। अगले दिन फकीर को यह शर्त बता दी गई। फकीर मोती लेने चला। किसी ने बताया कि मोती तो समुद्र में मिलते हैं। समुद्र के किनारे जाकर अपने करमण्डल (लोटे) से समुद्र का जल भरकर कुछ दूरी पर रेत में डालने लगा। कई दिन तक भूखा-प्यासा इसी प्रयत्न में लगा रहा। शरीर भी समाप्त होने को आया। जो भी देखता, वही कहता कि अल्लाह के लिए घर त्यागा था। अब नरक की तैयारी कर रहा है। समुद्र कभी खाली नहीं हो सकता। भक्ति कर। परमात्मा जिंदा बाबा के वेश में वहाँ प्रकट हुए तथा अधम शाह से पूछा कि क्या कर रहे हो? उसने बताया कि राजा की लड़की से विवाह करना है। उसके लिए मोतियों की शर्त रखी है। मोती समुद्र में बताए हैं। समुद्र खाली करके मोती लेकर जाऊँगा। जिन्दा ने कहा कि समुद्र खाली नहीं हो सकता। आप भूखे-प्यासे मर जाओगे। आप जिस मोक्ष के उद्देश्य के लिए घर से निकले हो। मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रयत्न करो तो कुछ बात बने। आपने जीवन को नष्ट करने की योजना बना ली है। अधम शाह ने कहा कि आपकी शिक्षा की मुझे कोई आवश्यकता नहीं है। मैं अपना कार्य कर रहा हूँ, तुम अपना करो। कबीर परमेश्वर जी ने कहा है किः-



विकार मरे मत जानिया, ज्यों भूभल (राख) में आग। जब करेल्लै धधकहीं, कोई बचै सतगुरू शरण लाग।।

 परमात्मा ने देखा कि भक्त तो मरेगा। समुद्र की झाल मारी, हजारों मोती रेत में पड़े थे। या अल्लाह कहकर अधम शाह ने हजारों मोती चद्दर में बाँध लिए और राजा के दरबार में जाकर रख दिए और कहा कि आप अपने वायदे अनुसार शहजादी का विवाह मेरे से कर दो। मंत्रियों ने सिपाहियों को आज्ञा दी कि इसको डण्डे मारो और मारकर जंगल में डाल आओ। ऐसा ही किया गया। परमात्मा की कृपा से वह मरा नहीं। कुछ दिन में चलने-फिरने लगा। कुछ दिन के पश्चात् राजा की लड़की मर गई। उसको कब्र में दबाकर चार पहरेदार छोड़ दिए कि कोई जंगली जानवर शव को खराब न कर दे। अधम शाह को पता चला। वह रात्रि को कब्र के पास गया। पहरेदार गहरी नींद में सोए थे। अधम शाह कब्र को खोदकर शव को निकालकर, कब्र को उसी तरह ठीक करके लड़की के शव को अपनी कुटिया में उठा ले गया। उसी रात्रि में बंजारों का काफिला रास्ता भूलकर उसी जंगल में चला गया। कुटिया में दीपक जल रहा था। लड़की का शव कफन में लिपटा दीवार के सहारे रखा जैसे लड़की पलाथी लगाकर बैठी हो। सर्दी का मौसम था। अग्नि लेने के लिए काफिले के दो व्यक्ति कुटिया पर गए। आवाज सुनकर अधम शाह डर गया कि राजा के आदमी आ गए। वह कुटिया के पीछे जाकर एक गुफा में छिप गया जिसमें वह साधना किया करता था। काफिले के व्यक्तियों ने मृत जवान लड़की को दीवार के सहारे बैठा देखा तो डर के मारे उलटे पैरों काफिले में जाकर बताया। एक वैद्य भी काफिले में रहता था। कई व्यक्ति तथा वैद्य वहाँ गये तो लड़की को देखते ही वैद्य ने कहा कि यह लड़की मरी नहीं है, इसको सदमा लगा है। उपचार कर सकता हूँ। काफिले के मालिक ने कहा कि आप उपचार करो। यदि लड़की स्वस्थ हो गई तो इसी से पूछेंगे कि कौन है तेरा पिता या पति कहाँ है? पहले लड़की के नग्न शरीर के ऊपर चद्दर डाली। फिर वैद्य ने हाथ की नस में चीरा देकर अशुद्ध रक्त निकाला। लड़की कुछ ही मिनटों में सचेत हो गई। बोली कि मैं यहाँ कैसे आयी हूँ। अधम शाह फकीर ने दीपक की रोशनी में देखा कि ये राजा के आदमी नहीं हैं। शहजादी भी जीवित हो गई है। वह काफिले के व्यक्तियों के पास आया और सारी दास्तां बताई जो लड़की ने भी सुनी। लड़की को काफिले के व्यक्तियों ने समझाया कि यदि आपको यह फकीर कब्र से निकालकर नहीं लाता तो आप तो संसार से चली गई होती। अब आपको चाहिए कि इस फकीर के साथ अल्लाह की रजा मानकर रहें। लड़की ने हाँ कर दी। उन व्यक्तियों ने दोनों का विवाह कर दिया, निकाह पढ़ दिया। काफिले के मालिक ने कहा कि यदि आप हमारे साथ चलना चाहें तो हम आपकी सेवा करेंगे, कोई कष्ट नहीं होने देंगे। गृहस्थी बना फकीर बोला कि हमारे को यहीं रहना है। मैं आपका अहसान कभी नहीं भूल सकूँगा। आप मेरे लिए अल्लाह का स्वरूप बनकर आए हो। हम दोनों की मौत होनी थी। आपने हमारे जीवन की रक्षा की है। उनको वहीं छोड़कर काफिले के व्यक्ति चले गए। कुछ दिन पश्चात् लड़की ने एक सुंदर पुत्रा को जन्म दिया। उसका नाम ‘‘इब्राहिम‘‘ रखा। चार वर्ष का बच्चा होने के पश्चात् बलख शहर के मौलवी के पास पढ़ने के लिए प्रवेश दिलाया। प्रतिदिन अधम बेटे को मौलवी के पास सुबह छोड़ आता, शाम को ले आता। एक दिन बलख का राजा उस मौलवी के पास गया। वह विधार्थियों को इनाम देता था। गरीब बच्चों को कपड़े बाँटता था। अधम शाह फकीर के लड़के को देखकर राजा हैरान रह गया। उसकी सूरत राजा की मृत लड़की से मिलती थी। राजा ने मौलवी से पूछा कि यह बच्चा किसका है? मौलवी ने बताया कि एक फकीर जंगल से आता है, उसका बालक है। सुबह छोड़कर जाता है, शाम को
ले जाता है। हमने अधिक पूछताछ नहीं की। लड़का भी उठकर राजा से लिपट गया। राजा ने उसे गोद में उठा लिया और चल पड़ा। मौलवी से कहा कि इसका पिता आए तो महल में भेज देना, वहाँ से ले जाएगा। राजा ने रानी को वह बालक दिखाया, वह तो देखते ही अपनी बेटी को याद करके मूर्छित होकर पृथ्वी के ऊपर गिर गई। सचेत होने पर बालक को सीने से लगाया। खाना खीर-हलवा स्वयं बनाकर खिलाया। रानी ने कहा कि यह तो अपनी लड़की से मिलती शक्ल का है। इतने में फकीर मौलवी के पास जाकर राजा के महल में चला गया। राजा ने नौकरों को बोल रखा था कि इस लड़के का पिता आए तो उसे रोकना नहीं, महल में आदर के साथ लेकर आना है। उसी फकीर को देखकर राजा ने कहा कि यह बालक किसका है? फकीर ने बताया कि यह मेरा लड़का है। आपकी लड़की से उत्पन्न हुआ है। राजा ने कहा कि फकीर होकर झूठ बोलना ठीक नहीं होता। फकीर ने सर्व कथा बताई। राजा को विश्वास नहीं हुआ। फकीर को साथ लेकर नौकरों के साथ पहले लड़की की कब्र को खोदा, वहाँ शव नहीं था। फकीर की कुटिया पर गए। उनकी लड़की कई स्थानों से फटे और पैबन्द लगे वस्त्रा पहने बैठी थी। अपने माता-पिता को देखते ही दौड़कर पिता-माता से बारी-बारी सीने से लगी। लड़की तथा फकीर को उनकी आज्ञा से तथा बच्चे को लेकर महल में आए। अधम को अपना उतराधिकारी नियुक्त कर दिया। जिस कारण से शाह कहा जाने लगा। उसका नाम ‘अधम’ था। कुछ दिन रहकर अधम शाह को राज-ठाठ अच्छे नहीं लगे। वह उनसे प्रेम से विदाई लेकर कुटिया में चला गया और कभी-कभी लड़के तथा पत्नी से मिल जाता था। कुछ वर्षों के पश्चात् अधम शाह फकीर की मुत्यु हो गई। उसकी समाधि कुटिया में बना दी। आसपास सुंदर बगीची बनाई गई। वहाँ मेले लगने लगे। बालक इब्राहिम नाना जी के राज्य का उतराधिकारी बनाया गया।


विचारणीय विषय:- भक्ति के लिए भक्त का शरीर स्वभाव बहुत सहयोगी होता है। अच्छे माता-पिता से मिले जन्म से बच्चे के शरीर में माता-पिता का स्वभाव भी साथ रहता है। इब्राहिम जिस जन्म में सम्मन मनियार था। उसने अपने लड़के की कुर्बानी सतगुरू की सेवा के लिए दी थी। कुछ कारण ऐसा बना था जो आप जी ने सुल्तान बोध के प्रारम्भ में पढ़ा। परमेश्वर जी यानि सतगुरू कबीर जी ने वह लड़का जीवित कर दिया था। वही सम्मन फिर राजा बना। भक्ति नहीं की। अबकी बार उस आत्मा को ऐसे पिता से शरीर दिया जो जन्म से परमात्मा पर समर्पित थे। सम्मन की आत्मा को मोक्ष दिलाने के लिए परमेश्वर जी ने अधम शाह में विवाह की प्रेरणा प्रबल की। लड़की को सदमा, समुद्र से मोती, बंजारों का काफिला रास्ता भूलकर कुटिया पर आना, लड़की को जीवित करना। इब्राहिम का जन्म अधम शाह से पाक आत्मा लड़की से होना जो एक फकीर के साथ रहकर साध्वी जीवन जी रही थी। उच्च विचार बने थे। संसार की कोई बुराई लड़की को नहीं लगी थी। सतगुरू के लिए अपने पुत्रा सेऊ (शिव) का बलिदान तथा नौशेरखान रूप में दान किए खजाने यानि अरबों रूपये। उस दान का फल भी उस जीव को देना था। उसके लिए परमेश्वर कबीर जी ने यह लीला की थी। आदम शाह फकीर का दादा उसी बलख शहर का राजा था जिसका राज्य अब्राहिम के नाना जी के पिता ने लड़ाई करके छीन लिया था। फिर वही राज्य उसी वंश के अब्राहिम को मिला। आदम शाह भी भक्ति से भटकने के कारण पशु की योनि में जन्मा। कबीर परमेश्वर जी ने कहा है कि:-

ये सब खेल हमारे किए। हम से मिले जो निश्चय जीये।।
जोजन मेरी शरण है, उसका हूँ मैं दास। गेल गेल लाग्या फिरूँ, जब तक धरती आकाश।।

    जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी पर सत्संग.                              7:30. से 8:30 बजे तक

बुधवार, 17 जून 2020

असली वासुदेव कौन है

जन्माष्टमी पर्व  श्रीकृष्ण जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है, जो रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

 श्रीकृष्ण देवकी और वासुदेव के 8वें पुत्र थे।मथुरा नगरी का राजा कंस था, जो कि बहुत अत्याचारी था। उसके अत्याचार दिन-प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे थे। एक समय आकाशवाणी हुई कि उसकी बहन देवकी का 8वां पुत्र उसका वध करेगा। यह सुनकर कंस ने अपनी बहन देवकी को उसके पति वासुदेवसहित काल-कोठारी में डाल दिया। कंस ने देवकी के कृष्ण से पहले के 7 बच्चों को मार डाला। जब देवकी ने श्रीकृष्ण को जन्म दिया, तब भगवान विष्णु ने वासुदेव को आदेश दिया कि वे श्रीकृष्ण को गोकुल में यशोदा माता और नंद बाबा के पास पहुंचा आएं, जहां वह अपने मामा कंस से सुरक्षित रह सकेगा। श्रीकृष्ण का पालन-पोषण यशोदा माता और नंद बाबा की देखरेख में हुआ। बस, उनके जन्म की खुशी में तभी से प्रतिवर्ष जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है।


लेकिन पूर्ण परमात्मा मां के  गर्भ से जन्म नहीं लेता वह कबीर साहेबजी है जो सह शरीर आए थे और लाखों लोगों की उपस्थिति में सहशरीर चले गए जबकि श्री कृष् जी मां की कोख से पैदा हुए और शिकारी की तीर से मृत्यु को प्राप्त हुए 
वेदों में लिखा है कि भगवान कभी मां के गर्भ से जन्म लेता तो फिर पूर्ण परमात्मा कौन  हुए।
 असली वासुदेव कबीर साहिब हैं श्री कृष्ण जी वासुदेव नहीं है क्योंकि कृष्ण जी के पिताजी का नाम वासुदेव था इसलिए उनको भी वासुदेव कहने लगे फिर भी श्री कृष्ण जी तीन लोक स्वर्ग लोक पाताल और पृथ्वी लोक के वासुदेव है बल्कि असंख्य ब्रह्मांड का मालिक वासुदेव पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब है

क्योंकि श्री कृष्ण जी की जीवनी में लिखा है एक बार वह श्रीकृष्ण ने इंद्र जो देवी देवताओं का राजा है उसकी पूजा भी छुड़वा कर उस एक परमात्मा की भक्ति करने के लिए प्रेरणा दी थी जिस कारण उन्होंने गोवर्धन पर्वत को उठा कर इंद्र के कोप से वजन वासियों की रक्षा की उस परमेश्वर के बारे में जानने के लिए कृपया अवश्य देखिए प्रतिदिन 7:30 से 8:30 तक साधना चैनल

मंगलवार, 9 जून 2020

पवित्र बाइबल में साकार परमेश्वर का प्रमाण

         " पवित्र बाइबल में साकार परमेश्वर का प्रमाण "
पवित्र बाइबिल (उत्पत्ति ग्रंथ पृष्ठ नं .2पर ,अ. 1:20 -2:5पर)
 छटवां दिन:-  प्राणी और मनुष्य 
अन्य प्राणियों की रचना करके फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बताएं, जो सर्व प्राणियो को काबू रहेगा|तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया अपने ही स्वरुप के अनुसार परमेश्वर ने उनको उत्पन्न किया नर और नारी करके मनुष्य की सृष्टि की !


 प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ो में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए है
(मांस खाना नहीं कहा है) 
 सातवां दिन:- विश्राम का दिन
 परमेश्वर 6 दिन में सर्व सृष्टि की उत्पत्ति की कथा सातवें दिन विश्राम किया


 अधिक जानकारी के लिए देखें 7:30 से 8:30 तक साधना चैनल पर

रविवार, 7 जून 2020

Kabir is Supreme Power

Kabir Parmeshwar, who appeared as an infant, did not eat anything for 25 days.  But it was such a healthy body as if drinking 1 kg of milk per day.  At the age of 25 days, Kabir Sahib ji took a sigh and said, I drink milk of virgin cow.  God Kabir said to Shiva that get a virgin cow, you slap on the cow and then with my blessings the virgin cow will give milk.  Neeru brought a heifer, cow gave milk.
 Poor, unbearable
 Piva child Brahmagati, there Shiva bhai Dayal.




Once God Kabir Saheb, when he was 5 years old, discussed knowledge with Ramanand ji at the age of 104, introduced many legends, introduced himself and showed Satlok when Ramanand ji firmly believed that Kabir  Sahib is the only creator of the universe.


For more information, see Satsang on Sadhana TV from 7:30 to 8:30

गुरुवार, 4 जून 2020

623rd_GodKabir_PrakatDiwas

काशी में एक लहरतारा तालाब था। गंगा नदी का जल लहरों के द्वारा नीची पटरी के ऊपर से उछल कर एक सरोवर में आता था। इसलिए उस सरोवर का नाम लहरतारा पड़ा। उस तालाब में बड़े-2 कमल के फूल उगे हुए थे। नीरू-नीमा(नि:सन्तान दम्पत्ति थे) ज्येष्ठ मास की शुक्ल पूर्णमासी विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के लिए गए हुए थे। वहां नीरू - नीमा को कमल कद फूल पर शिशु रूप में कबीर परमात्मा मिले थे।



कबीर परमेश्वर शिशु रूप में काशी में अवतरित हुए तो उनको देखने के लिए पूरी काशी के लोग उमड़ उमड़ कर आ रहे थे। ऐसा अद्भुत बच्चा उन्होंने आज तक नहीं देखा था। बच्चे का शरीर सफेद बर्फ की तरह चमक रहा था। बालक को देखने के लिए ऊपर से सूक्ष्म रूप में देवता भी आए।
गरीब, गोद लिया मुख चूंबि कर, हेम रूप झलकंत।
जगर मगर काया करै, जैसे दमकैं पदम अनंत।।


Kabir Prakat Diwas 2020
#5जून_महासत्संग_साधनाTVपर
ज़रूर देखें 5 जून को साधना चैनल पर महा सत्संग सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक।

KabirPrakatDiwasNotJayanti

Kabir Saheb's manifest day is not a birth anniversary!
 In 1398 (Vikrami Samvat 1455) Jyeshtha came to the Shuddha Purnamasi on the month of Shuddha Purnamasi and came back from his Satyaloka in the form of a child, and God Kabir seated on a lotus flower in Lahartara pond.
 Full God is not born from the mother's womb.



Kabir Saheb Jayanti VS Kabir Saheb Manifest Day
 Kabir Saheb has made it clear in his writings that he is not born.
 Neither my birth nor my womb settled, I was shown as a child.
 Camp on Kashi Nagar Jal Kamal, found here.
 Parents are not my children, nor my house maid.
 The bridegroom's sister-in-law said, "Make the world mine."



1DayLeft_KabirPrakatDiwas
For more information, see Satsang on Sadhana TV from 7:30 to 8:30

बुधवार, 3 जून 2020

कबीरपरमेश्वर_का_अद्भुतज्ञान


तत्वज्ञान
कबीर साहेब ने ही हमें अवगत कराया कि हमें जन्म देने व मारने में काल (ब्रह्म) प्रभु का स्वार्थ है जोकि श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में कहता है कि मैं बढ़ा हुआ काल हूँ अर्जुन।


ज्ञान का भंडार - कबीर परमात्मा
परमात्मा कबीर जी ने धर्मदास जी को बताया कि मैं अपनी प्यारी आत्माओं को काल के जाल से निकालने के लिए काल के इन 21 ब्रह्मांडों में घूमता रहता हूं और सत्य ज्ञान देकर व शास्त्रानुकूल साधना बताकर पार करता हूं।


#5Jun_MegaSatsang_SadhnaTv9AM
अधिक जानकारी के लिए साधना टीवी पर सत्संग देखें 7:30 से 8:30

परमेश्वर कबीर जी की सत भक्ति से होते हैं अनेकों लाभ

🧭परमेश्वर कबीर जी की सत भक्ति से होते हैं अनेकों लाभ🧭 कबीर परमेश्वर जी पूर्ण ब्रह्म सर्व सृष्टि रचनहार कुल मालिक चारों युगों में सतलोक से ...