सोमवार, 27 जून 2022

परमेश्वर कबीर जी की सत भक्ति से होते हैं अनेकों लाभ

🧭परमेश्वर कबीर जी की सत भक्ति से होते हैं अनेकों लाभ🧭


कबीर परमेश्वर जी पूर्ण ब्रह्म सर्व सृष्टि रचनहार कुल मालिक चारों युगों में सतलोक से चलकर पृथ्वी पर आते हैं और हर युग में अनेकों लीलाएं करते हैं।
ऐसे 600 वर्ष पहले काशी में कलियुग में आये थे और अनेकों लीलाएं की। अपने शिष्यों को ऐसे ऐसे लाभ दिये जो सिर्फ पूर्ण परमात्मा ही दे सकता है।

एक सर्वानन्द नाम के महर्षि थे। उसकी आदरणीय माता श्रीमती शारदा देवी पाप कर्म फल से पीड़ित थी। उसने कबीर परमात्मा से उपदेश प्राप्त किया तथा उसी दिन कष्ट मुक्त हो गई। 
क्योंकि पवित्र यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32
में लिखा है कि ‘‘कविरंघारिरसि‘‘ अर्थात् (कविर्) कबीर (अंघारि) पाप का शत्रु (असि) है। फिर इसी पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में लिखा है कि परमात्मा (एनसः एनसः) अधर्म के अधर्म अर्थात् पापों के भी पाप घोर पाप को भी समाप्त कर देता है।

त्रेतायुग में कबीर परमेश्वर मुनिंद्र नाम से प्रकट हुए तब नल व नील दोनों मोसी मोसी के भाई थे वह दोनों भयंकर कष्ट से पीड़ित थे उन्होंने जगह जगह अपना इलाज करवाके थक चुके थे फिर परमेश्वर ने उनको शरण में लिया और रोग मुक्त किया उनकी कृपा से ही समुंद्र पर पत्थर तैरे धर्मदास जी के वाणी में इसका प्रमाण है।

रहे नल नील जतन कर हार, तब सतगुरु से करी पुकार | जा सत रेखा लिखी अपार, सिंधु पर सिला तिराने वाले|| धन्य- धन्य सत्य कबीर भक्त की पीड़ मिटाने वाले||


द्वापरयुग में द्रोपदी का चीर बढ़ाना, हिरण्यकशिपु से भक्त प्रहलाद की रक्षा करना, दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोदी के जलन का रोग ठीक करना, रावण का वध करना आदि।


ऐसी ऐसी और भी अनेकों की हैं जो कोई साधारण व्यक्ति नहीं कर सकता।
कबीर साहेब जी ही पूर्ण परमात्मा सर्व ब्रह्मांडों के मालिक हैं। वेदों प्रमाण है कि वह पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है।
इन चमत्कारों से स्पष्ट है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी ही हैं।
ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है।

और ऐसे ही लाभ आज वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज के द्वारा बताई गई भक्ति साधना करने वाले भक्तों को हो रहे हैं।

नाम कृष्ण कुमार (Krishan kumar) हैं। उत्तम नगर दिल्ली के रहने वाला है। संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लेने से पहले हार्ट, ब्लड प्रेशर, पथरी, रीड की हड्डी के दर्द से पीड़ित थे। संत रामपाल जी महाराज से नाम उपदेश लिया, मर्यादा पूर्ण सत भक्ति की। आज बिना किसी दवा से पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं।

नाम संजय दास (Sanjay Das), जिला भोपाल मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं।
इनकी पत्नी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब रहती थी। फेफड़े खराब हो गये थे, हॉस्पिटल में जिंदगी और मौत के बीच में लटक रहे थे। फिर संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना की उनसे नाम उपदेश लेकर सत भक्ति की आज पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं। 

नाम चेतराम (Chetram) है खरगौन मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं इनको संत रामपाल जी महाराज की शरण में आने से पहले यह गायत्री परिवार से जुड़े हुए थे। वहां बताई गई भक्ति करते करते इनको कैंसर की बीमारी हो गई। जिसको लेकर इन्होंने जगह जगह डॉक्टरों को दिखाकर थक चुके थे। फिर किसी ने संत रामपाल जी महाराज के बारे में बताया और उनसे नाम उपदेश लेकर सत भक्ति करने से आज पूरी तरह स्वस्थ हैं।

और ऐसे ही लाभ सभी भक्तों को मिलते हैं और मिल रहे हैं। जिसका प्रमाण है उनके लाखों अनुयाई और उनका परिवार।

#TrueWorship_TrueHappiness
#SantRampalJiMaharaj

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गुरुवार, 23 जून 2022

अविनाशी अजर अमर परमात्मा कविर्देव

🕊अविनाशी अजर अमर परमात्मा कविर्देव🕊

यजुर्वेद अध्याय 5 मन्त्र 32 में लिखा है कि "कविरंघारि: असि, बम्भारि: असि स्वज्योति ऋतधामा असि) कबीर परमेश्वर पापों का शत्रु अर्थात पाप नष्ट करता है, वह बंधनों का शत्रु अर्थात बंधनों से छुड़वाता है। वह स्वप्रकाशित शरीर वाला सतलोक में रहता है। जो कि सभी देवों तथा हम सभी जीव आत्माओं के जनक है। वही समर्थ परमात्मा हैं।

कबीर साहेब जी को 52 (बावन) बार मारने की कोशिश की गई। उनको यातनाएं दी गई, उनको ये यातनाएं इसलिए दी गई थी कि कबीर साहेब जी ने धार्मिक और सामाजिक पाखंड का विरोध किया व सद्ग्रंथो में वर्णित सतभक्ति का प्रकाश फैलाने के लिए जगह-जगह अपना अमर संदेश सुनाया। शास्त्र विरुद्ध साधना कर रहे हिन्दुओं को अपनी वाणियों द्वारा जगाया। 


आज से 600 वर्ष पूर्व परमात्मा के 64 लाख शिष्य हुए। दोनों धर्मों के और सभी वर्गों के व्यक्तियों ने परमेश्वर कबीर साहेब से उपदेश प्राप्त किया क्योंकि परमेश्वर कबीर साहेब के आशीर्वाद से सभी के दुखों का अंत हो जाता था। उन्ही शिष्यों में से एक था दिल्ली का सुल्तान सिकंदर लोधी।

कबीर परमेश्वर जब कलयुग में 600 वर्ष पहले आए तो तत्कालीन सुल्तान सिकंदर लोदी के पीर शेख तकी ने कबीर परमेश्वर से ईष्यावश उन्हें मारने की 52 कुचेष्टाएं की।

 कबीर परमात्मा को ख़त्म करने के लिए हिन्दू और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बहुत से प्रयास किये। बादशाह सिकंदर लोधी से उनकी झूठी शिकायतें करके उनको कई बार सज़ा करवाने की कोशिश की गयी। ऐसे ही एक बार सिकंदर लोधी ने कबीर साहेब को हाथी से कुचलवाने की सजा दी। कबीर परमात्मा जी के हाथ पाँव बांध कर उन्हें एक मदोन्मत खूनी हाथी के आगे डाल दिया गया। पर जब हाथी कबीर परमात्मा को मारने के लिए आगे बढ़ा तो उसे परमात्मा के स्थान पर एक बब्बर शेर दिखाई दिया। सिकंदर लोधी को भी परमात्मा का विराट रूप दिखाई दिया। हाथी अपनी जान बचा कर भाग गया तथा राजा भी थर्र थर्र काँपता हुआ नीचे आया और कबीर परमेश्वर को दंडवत प्रणाम किया।

शेखतकी ने जुल्म गुजारे, बावन करी बदमाशी | 
खूनी हाथी के आगे‌ डालै, बांध जूड अविनाशी||

गंगा में डुबो कर मारने की कोशिश

जब ये प्रयास भी सफल न हुआ तो कबीर जी को गंगा में डुबो कर मारने की कोशिश की गयी। उनके हाथ-पांव बांध कर उन्हें गंगा में डाल दिया गया पर सर्व शक्तिमान कबीर परमेश्वर जल के ऊपर आराम से बैठे रहे। जब कबीर साहेब नहीं डूबे तो चार पहर तक उनके ऊपर गोलियां और तोपों की बारिश की गयी। सबने अपने परम पिता परमात्मा पर पत्थर बरसाए। पर परमेश्वर कबीर साहेब को कोई हानि नहीं पहुंची। तब कबीर साहेब वहां से अंतर्ध्यान हो गए और अपनी कुटिया में प्रकट हो गए।



कबीर साहेब जी को नीचा दिखाने की कुचेष्टा

एक बार शेखतकी पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए 3 दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी आश्रमों में झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी 3 दिन का भंडारा करेंगे, भोजन के बाद एक अशर्फी, एक दोहर भी देंगे।
उनका उद्देश्य ये था कि कबीर जी के पास खाना खिलाने के लिए कुछ होगा नहीं, डरकर भाग जायेगा। लेकिन परमेश्वर कबीर साहेब जी ने अपनी शक्ति का परिचय दिया व 18 लाख लोगों को 3 दिन तक मोहन भोजन कराया और सबको अशर्फी और दोहरें दी। शेखतकी का ये प्रयास भी विफल हुआ व ये सब लीला देख कई लाखों लोगों ने कबीर साहेब जी की दीक्षा ली।
कबीर साहेब ने 3 दिन का भंडारा भी करा दिया था, उनकी महिमा भी हुई। ऐसे ऐसे कई सितम लोगों ने धार्मिक गुरुओं के बहकावे मे आकर परमेश्वर कबीर साहेब जी के साथ किए थे। 

शेख तकी के षड्यंत्र के कारण कबीर परमेश्वर को मारने के लिए गंगा दरिया में डुबाने की कुचेष्टा की गयी, तोप के गोले दागे, खूनी हाथी के सामने डाल दिया, गर्म तेल के कड़ाहे में डाल दिया, एक रात्रि को तलवार से काटा गया। लेकिन सारे षड्यंत्र फैल हो गये थे। क्योंकि वे अविनाशी हैं, जन्म-मृत्यु से परे हैं।

कबीर, हाड चाम लहू ना मोरे, जाने सतनाम उपासी।
तारन तरन अभय पद(मोक्ष) दाता, मैं हूं कबीर अविनाशी।।

पानी से पैदा नहीं, स्वांसा नहीं शरीर।
अन्न आहार करता नहीं, ताका नाम कबीर।।

आज यही स्थिति संत रामपाल महाराज जी के साथ है। संत रामपाल महाराज जी सभी धर्मों के सद्ग्रन्थों में प्रमाणित सत्य भक्ति विधि बताते हैं। जिस कारण से 600 वर्ष पहले हुई घटनाओं को आज फिर से दोहराया जा रहा है लेकिन वर्तमान में सर्व जनता शिक्षित है अब उन अज्ञानियों की दाल नहीं गलने वाली। वर्तमान में परमेश्वर कबीर साहेब जी के अवतार संत रामपाल महाराज जी है। अब समय संत रामपाल जी महाराज जी से दीक्षा लेकर मोक्ष प्राप्त करने का है।

#कबीरपरमात्मा_अविनाशी_हैं
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परमेश्वर कबीर जी की सत भक्ति से होते हैं अनेकों लाभ

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