गुरुवार, 23 जून 2022

अविनाशी अजर अमर परमात्मा कविर्देव

🕊अविनाशी अजर अमर परमात्मा कविर्देव🕊

यजुर्वेद अध्याय 5 मन्त्र 32 में लिखा है कि "कविरंघारि: असि, बम्भारि: असि स्वज्योति ऋतधामा असि) कबीर परमेश्वर पापों का शत्रु अर्थात पाप नष्ट करता है, वह बंधनों का शत्रु अर्थात बंधनों से छुड़वाता है। वह स्वप्रकाशित शरीर वाला सतलोक में रहता है। जो कि सभी देवों तथा हम सभी जीव आत्माओं के जनक है। वही समर्थ परमात्मा हैं।

कबीर साहेब जी को 52 (बावन) बार मारने की कोशिश की गई। उनको यातनाएं दी गई, उनको ये यातनाएं इसलिए दी गई थी कि कबीर साहेब जी ने धार्मिक और सामाजिक पाखंड का विरोध किया व सद्ग्रंथो में वर्णित सतभक्ति का प्रकाश फैलाने के लिए जगह-जगह अपना अमर संदेश सुनाया। शास्त्र विरुद्ध साधना कर रहे हिन्दुओं को अपनी वाणियों द्वारा जगाया। 


आज से 600 वर्ष पूर्व परमात्मा के 64 लाख शिष्य हुए। दोनों धर्मों के और सभी वर्गों के व्यक्तियों ने परमेश्वर कबीर साहेब से उपदेश प्राप्त किया क्योंकि परमेश्वर कबीर साहेब के आशीर्वाद से सभी के दुखों का अंत हो जाता था। उन्ही शिष्यों में से एक था दिल्ली का सुल्तान सिकंदर लोधी।

कबीर परमेश्वर जब कलयुग में 600 वर्ष पहले आए तो तत्कालीन सुल्तान सिकंदर लोदी के पीर शेख तकी ने कबीर परमेश्वर से ईष्यावश उन्हें मारने की 52 कुचेष्टाएं की।

 कबीर परमात्मा को ख़त्म करने के लिए हिन्दू और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बहुत से प्रयास किये। बादशाह सिकंदर लोधी से उनकी झूठी शिकायतें करके उनको कई बार सज़ा करवाने की कोशिश की गयी। ऐसे ही एक बार सिकंदर लोधी ने कबीर साहेब को हाथी से कुचलवाने की सजा दी। कबीर परमात्मा जी के हाथ पाँव बांध कर उन्हें एक मदोन्मत खूनी हाथी के आगे डाल दिया गया। पर जब हाथी कबीर परमात्मा को मारने के लिए आगे बढ़ा तो उसे परमात्मा के स्थान पर एक बब्बर शेर दिखाई दिया। सिकंदर लोधी को भी परमात्मा का विराट रूप दिखाई दिया। हाथी अपनी जान बचा कर भाग गया तथा राजा भी थर्र थर्र काँपता हुआ नीचे आया और कबीर परमेश्वर को दंडवत प्रणाम किया।

शेखतकी ने जुल्म गुजारे, बावन करी बदमाशी | 
खूनी हाथी के आगे‌ डालै, बांध जूड अविनाशी||

गंगा में डुबो कर मारने की कोशिश

जब ये प्रयास भी सफल न हुआ तो कबीर जी को गंगा में डुबो कर मारने की कोशिश की गयी। उनके हाथ-पांव बांध कर उन्हें गंगा में डाल दिया गया पर सर्व शक्तिमान कबीर परमेश्वर जल के ऊपर आराम से बैठे रहे। जब कबीर साहेब नहीं डूबे तो चार पहर तक उनके ऊपर गोलियां और तोपों की बारिश की गयी। सबने अपने परम पिता परमात्मा पर पत्थर बरसाए। पर परमेश्वर कबीर साहेब को कोई हानि नहीं पहुंची। तब कबीर साहेब वहां से अंतर्ध्यान हो गए और अपनी कुटिया में प्रकट हो गए।



कबीर साहेब जी को नीचा दिखाने की कुचेष्टा

एक बार शेखतकी पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए 3 दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी आश्रमों में झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी 3 दिन का भंडारा करेंगे, भोजन के बाद एक अशर्फी, एक दोहर भी देंगे।
उनका उद्देश्य ये था कि कबीर जी के पास खाना खिलाने के लिए कुछ होगा नहीं, डरकर भाग जायेगा। लेकिन परमेश्वर कबीर साहेब जी ने अपनी शक्ति का परिचय दिया व 18 लाख लोगों को 3 दिन तक मोहन भोजन कराया और सबको अशर्फी और दोहरें दी। शेखतकी का ये प्रयास भी विफल हुआ व ये सब लीला देख कई लाखों लोगों ने कबीर साहेब जी की दीक्षा ली।
कबीर साहेब ने 3 दिन का भंडारा भी करा दिया था, उनकी महिमा भी हुई। ऐसे ऐसे कई सितम लोगों ने धार्मिक गुरुओं के बहकावे मे आकर परमेश्वर कबीर साहेब जी के साथ किए थे। 

शेख तकी के षड्यंत्र के कारण कबीर परमेश्वर को मारने के लिए गंगा दरिया में डुबाने की कुचेष्टा की गयी, तोप के गोले दागे, खूनी हाथी के सामने डाल दिया, गर्म तेल के कड़ाहे में डाल दिया, एक रात्रि को तलवार से काटा गया। लेकिन सारे षड्यंत्र फैल हो गये थे। क्योंकि वे अविनाशी हैं, जन्म-मृत्यु से परे हैं।

कबीर, हाड चाम लहू ना मोरे, जाने सतनाम उपासी।
तारन तरन अभय पद(मोक्ष) दाता, मैं हूं कबीर अविनाशी।।

पानी से पैदा नहीं, स्वांसा नहीं शरीर।
अन्न आहार करता नहीं, ताका नाम कबीर।।

आज यही स्थिति संत रामपाल महाराज जी के साथ है। संत रामपाल महाराज जी सभी धर्मों के सद्ग्रन्थों में प्रमाणित सत्य भक्ति विधि बताते हैं। जिस कारण से 600 वर्ष पहले हुई घटनाओं को आज फिर से दोहराया जा रहा है लेकिन वर्तमान में सर्व जनता शिक्षित है अब उन अज्ञानियों की दाल नहीं गलने वाली। वर्तमान में परमेश्वर कबीर साहेब जी के अवतार संत रामपाल महाराज जी है। अब समय संत रामपाल जी महाराज जी से दीक्षा लेकर मोक्ष प्राप्त करने का है।

#कबीरपरमात्मा_अविनाशी_हैं
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पवित्र पुस्तक "कबीर परमेश्वर"
https://bit.ly/KabirParmeshwarBook

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