बुधवार, 1 जुलाई 2020

संत नामदेव जी की कथा

                        संत नामदेव जी की कथा
संत नामदेव जी का जन्म सन् 1270 (विक्रमी संवत् 1327) में छीपा जाति में गाँव-पुण्डरपुर, जिला-सतारा (महाराष्ट्र प्रान्त) में हुआ। स्थानीय गुरूओं के विरोध के कारण नामदेव जी महाराष्ट्र त्यागकर हरिद्वार चले गए। उस समय दिल्ली का सम्राट मोहम्मद बिन तुगलक था। सन् 1325 में किसी ने राजा से कहा कि एक हिन्दु संत नामदेव हिन्दु धर्म का प्रचार कर रहा है। उसके विषय में सुना है कि वह पत्थर की मूर्ति में प्राण स्थापित करके दूध पिला देता है आदि-आदि। राजा ने परीक्षा करने के लिए संत नामदेव जी को दिल्ली बुलाया। राजा के सिपाही संत जी को बाँधकर ले गए। एक गाय को तलवार से गर्दन से काटा गया और संत नामदेव से कहा कि तू जनता को भ्रमित करता फिरता है।इस गाय को जीवित कर नहीं तो तेरे को मृत्यु दंड दिया जाएगा। संत नामदेव जी ने परमेश्वर से रक्षार्थ हृदय से पुकार की। उसी समय गाय जीवित हो गई। नामदेव को गुरूजी के साक्षात दर्शन हुए। गाय जीवित करके अंतर्ध्यान हो गए। मोहम्मद बिन तुगलक ने संत जी से क्षमा याचना की और छोड़ दिया।


‘‘नामदेव जी की भक्ति-श्रद्धा से मंदिर घुमाना’’
गाँव पुण्डरपुर में बीठल भगवान का मंदिर था। उसमें सुबह तथा शाम को आरती होती थी। उस समय छूआछात अधिक थी। एक दिन नामदेव जी मंदिर के पास से बने रास्ते पर जा रहे थे। मंदिर में आरती चल रही थी। पंडित जन हाथों में घंटियाँ तथा खड़ताल लेकर बजा रहे थे। नामदेव जी को भी धुन चढ़ गई। उसने अपनी जूतियाँ हाथों में ली और उनको एक-दूसरी से मारने लगा और मंदिर में पहुँच गया। पंडितों के बीच से भगवान बिठल जी की मूर्ति के सामने खड़ा हो गया। पंडितों ने देखा कि नामदेव ने अपवित्रा जूतियाँ हाथ मेंले रखी हैं। मंदिर में प्रवेश कर गया है। मंदिर अपवित्रा हो गया है। भगवान बिठल रूष्ट हो गए तो अनर्थ हो जाएगा। नामदेव जी को खैंच कर (घसीटकर) मंदिर के पीछे डाल दिया। भक्त नामदेव जी पृथ्वी पर गिरे-गिरे भी जूतियाँ पीट रहे थे, आरती गा रहे थे। उसी क्षण मंदिर का मुख नामदेव जी की ओर घूम गया। पंडित जन मंदिर के पीछे खड़े-खड़े घंटियाँ बजा रहे थे। करिश्मा देखकर घंटियाँ बजाना बंद करके स्तब्ध रह गए। उस मंदिर का मुख सदा उस ओर रहा। गाँव तथा दूर देश के व्यक्ति भी यह चमत्कार देखने आए थे।भक्त नामदेव जी की भक्ति की प्रसिद्धि आग की तरह सारे क्षेत्र में फैल गई।

अधिक जानकारी के लिए देखिए साधना टीवी पर सत्संग.                        7:30 से 8:30 बजे तक

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